Gold Silver Ratio Latest Update: गोल्ड–सिल्वर रेशियो में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इसके साथ ही सोलर इंडस्ट्री में सिल्वर की खरीद भी काफी कम हो गई है, जिससे बाजार में सवाल उठ रहा है कि अब चांदी की कीमतों का आगे क्या होगा?
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पहले जहां सोलर पैनल बनाने में सिल्वर (Silver) की भारी मांग रहती थी, वहीं अब कंपनियां लागत बचाने के लिए कम-सिल्वर टेक्नोलॉजी और विकल्पी मटेरियल की ओर बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर सिल्वर की खपत पर देखा जा रहा है।
गोल्ड–सिल्वर रेशियो (gold silver ratio) टूटने का मतलब है कि सिल्वर ने गोल्ड के मुकाबले ज्यादा कमजोरी दिखाई है। यह स्थिति आमतौर पर निवेशकों के मन में अनिश्चितता बढ़ाती है।
अब बाजार का सबसे बड़ा सवाल है:
👉 कमी हुई इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण चांदी का रुझान नीचे जाएगा?
या
👉 कम कीमतों पर निवेशकों की वापसी से तेजी आएगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि ग्लोबल इंडस्ट्रियल डिमांड और फेड की पॉलिसी दोनों ही चांदी के ट्रेंड को तय करेंगे।
तो सबसे पहले हम लोग बात करेंगे आज सिल्वर को लेकर क्योंकि सिल्वर जो है इस समय काफी इंटरेस्टिंग बना हुआ है। देखिए गोल्ड में एक ठहराव सा आ गया है और गोल्ड में देखा भी जा रहा है कि अगले एकद महीने तक जो है उसमें ठहराव सा रहेगा। लेकिन सिल्वर में काफी जबरदस्त उठापटक चल रहा है। बहुत जबरदस्त ढंग से। और जो जो डेवलपमेंट हो रहा है वो आपके सामने है।
इकॉनमी (Economy)
इकॉनमी में क्या होता है कि एक-एक खबर पे Silver है वो ऊपर भागता है। एक-एक खबर पे नीचे जाता है। तो इसलिए अपडेट रहना बहुत जरूरी होता है। देखिए सिल्वर और गोल्ड के रेश्यो में जो गिरावट हुई है वहां से एक खबर निकल कर आ रही है
देखिए पहले साल के शुरुआत में हम लोग जान रहे थे कि 1:90 के ऊपर का था। उसके बाद से फिर ये धीरे-धीरे कम हुआ और पिछले एक हफ्ते में एक हफ्ते पहले जो है ये 1:78 था। मतलब 1 ग्राम गोल्ड पे 78 ग्राम चांदी मिल रहा था। अब वो रेशियो घटकर जो है 1:72 आ गया है। मतलब अब 1 ग्राम गोल्ड पे 72 ग्राम चांदी मिल रहा है। जो कि इस बात को रिफ्लेक्ट कर रहा है कि चांदी किस तरीके से मजबूत हुआ है। क्योंकि गोल्ड जो है वो अभी अपने ऑल टाइम हाई से नीचे ही है। जो ऑल टाइम हाई बनाया था उसने 4400 का उससे $200 नीचे है। जबकि सिल्वर जो है वह अपने $58 वाले बैरियर को तोड़ते हुए ऊपर चला गया था और $59.32 पे चला गया था और वहां पे फिर एक बिकवाली का प्रेशर आया और वो आकर बंद हो गया $58 जो है काफी जबरदस्त उठापटक देखा जा रहा है। और यह जो रेशियो के हिसाब से यह जो बातें आ रही है कि जिस तरीके से रेशियो तेज गिरा है उसमें एक अनुमान लगाया जा रहा है कि यह रेशियो आकर जो है 1:65 आ सकता है। और इसमें क्या होगा कि जैसे आप आप कहेंगे कि गोल्ड अगर ऊपर भागेगा तो फिर सिल्वर भी भागेगा। लेकिन इसमें एक चीज़ देखा जा रहा है कि गोल्ड की तुलना में सिल्वर में अभी तेजी ज़्यादा बनी रहेगी। और इस पे 1:65 आने में अब उसको जो है 5 महीने लगेंगे कि 6 महीने लगेंगे यह कहना मुश्किल है।
टाइम पीरियड नहीं बताया जा सकता है। लेकिन यह आता हुआ दिख रहा है उसमें और सिल्वर जो है इसमें जो बैरियर दिख रहा है उसका जो $58 जो है एक बड़ा बैरियर है $58 को वो किस तरीके से क्रॉस करता है कितने अच्छे के साथ वॉल्यूम के साथ क्रॉस करता है वो एक बड़ा फैक्टर होगा और जो हम लोग पहले भी बात कर चुके हैं कि 29 दिसंबर जो है वो एक बड़ा अहम पड़ाव है और इसके इसको किस तरीके से निकालता है चूंकि यहां पे जो है यह आखिरी लड़ाई होगी डेरिवेटिव्स की और जो है सिल्वर का जो फिजिकल का जो है वह आखिरी लड़ाई होगा एक तरीके से उसके बाद से जो जीतेगा वही सिकंदर होगा। अगर डेरिवेटिव्स जीतता है तो रेट को नीचे गिरा सकता है। बहुत तेज़ नीचे गिरा सकता है और यह रेट जो है $53 — $54 पे आता हुआ दिख सकता है। और अगर ये मजबूत होता है फिजिकल मजबूत होता है तो फिर ये जो है $59 — $58 वाले बैरियर को ठीक-ठाक से क्रॉस करते हुए $60 के आसपास भी जाता हुआ दिख सकता है।
तो ये तमाम कई सारी चीजें रहेंगी। लेकिन उसमें जो कई चीजें जो डेवलपमेंट है अब पहले तो हम लोग गोल्ड सिल्वर रेशियो को खत्म कर देते हैं फिर आते हैं दूसरे डेवलपमेंट पे। तो ये चीज देखा गया है कि 1970 में या 2011 में जो है या 2020 में जो रेशियो गिरने पे जो जिस तरीके से सिल्वर ने तेजी पकड़ा था वही ट्रेंड इस समय दिख रहा है। उसमें ये देखा जाता है कि जब गोल्ड और सिल्वर में जो बात कही जाती है गोल्ड भी बढ़ेगा सिल्वर भी बढ़ेगा। लेकिन वहां पे ये हो जाता है कि गोल्ड में थोड़ी सी ठहराव हो जाती है और सिल्वर में बड़ी जबरदस्त तेजी आ जाती है।
तो ये ट्रेंड देखा गया था। तो ये चीज है और इस बार का जो ब्रेकआउट था वो 1967 – 1973 और 1979 वाले ब्रेकआउट का जो ऑल टाइम ब्रेकआउट किया था उसी के मूव से मिलताजुलता हुआ ये है और इसमें एक चीज देखा जा रहा है कि जून 26 तक जो है ऐसा एक्सपर्ट लोग कह रहे हैं। इसमें कोई मेरी राय नहीं है जोकि उन उनकी राय है तो वह मैं आपके सामने पेश कर रहा हूं कि जून 26 तक जो है यह $0 प्रति अंश जाता हुआ दिख रहा है और अभी है 58 के आसपास तो यहां से 12 प्रति अांश जो है ऊपर जंप करता हुआ मतलब अगले 7 महीने में ऐसा अभी प्रतीत हो रहा है। अब आते हैं हम लोग कि जो सिल्वर
फिजिकल सिल्वर (Physical Silver)
को लेकर जो कई सारे चीजें हुई है। एक बड़ी सारी डेवलपमेंट हो गया उसमें। सबसे पहले तो हो गया कि जो जेपी मॉ्गन जो है वो जो ट्रेडिंग करते थे जो डेरिवेटिव्स पे खेल करते थे फिजिकल सिल्वर जो बहुत कम वो खरीदारी करते थे उनका मेन पर्पस होता था कि डेरिवेटिव्स के जरिए मार्केट को कंट्रोल करना और उसके रेट को नीचे रखना जिस पे वो हारता हुआ दिखा था और बीच में जो 11 घंटे के लिए जो कॉमिक्स में जो कामकाज बंद हो गया था जिसमें कि देखा गया कि उसके अकाउंट में जो है बहुत सारे जो है वो जो उपलब्ध थे
कि जेपी मॉ्गन (J.P. Morgan) जो है अभी जो यह आंकड़ा आया है कि उसने अब यह टाइम पीरियड दो-ती महीने 6 महीने के अंदर का है कि उसने जो है लगभग 5256 मेट्रिक टन सिल्वर खरीदा है। 5256 मेट्रिक टन सिल्वर खरीदा है। और अब जेपी मॉ्गन के पास जो टोटल जो उसके पास जो सिल्वर है इस समय वह है 20992 मेट्रिक टन लगभग 21000 मेट्रिक टन उसके पास सिल्वर पड़ा हुआ है। अब देखिए यहां पे ये खेल हो सकता है।कि जेपी मॉ्गन के पास फिजिकल सिल्वर की कमी थी जो 5000 खरीद के बाद यह ₹21,000 पे पहुंच गया। अब यह
डेरिवेटिव्स पे जो खेल करता है तो उसके लिए जो बात होती थी कि भाई फिजिकल सिल्वर चाहिए तो वो फिजिकल सिल्वर इसके पास आ गया है। तो यहां से जेपी मॉर्गन खेल कर सकता है कीमतों पे। यह एक फैक्टर है। दूसरा जो चीज देखी जा रही है वह सोलर पैनल को लेकर क्योंकि जो हम लोगों ने देखा था कि जिस तरीके से इंडस्ट्री का डिमांड बढ़ रहा था बहुत तेज बढ़ रहा था और सोलर पैनल पे जो है लगभग 7000 मेट्रिक टन के आसपास खपत होने लगा था। अब उस सोलर पैनल में जो है कमी देखी जा रही है और उसमें से पांच कंपनियों का रिपोर्ट सामने आया है
जिसमें से कि लंगी जिंको जे ए सोलर ट्रीना फर्स्ट सोलर ये दुनिया की पांच बड़ी कंपनियां है। इसने सिल्वर खरीदना थोड़ा कम कर दिया है। क्यों? क्योंकि सिल्वर का रेट काफी ऊपर भाग गया है। तो इनको जो है अब सोलर पैनल बनाना महंगा पड़ रहा है। क्योंकि इस समय इसके कीमत के भागने के बाद से सोलर पैनल में जो सोलर पैनल जो बनता है उसमें 14% जो है वो सिल्वर पे लग जा रहा था। तो जिसके कारण इसकी लागत बढ़ रही थी। तो इसने कोई एक नया टेक्नोलॉजी लाया है और उसके जरिए जो है कम सिल्वर के पेस्टिंग से वो काम चल जाएगा। अब कम कितना परसेंट कम होगा वो
नहीं कहा जा सकता लेकिन जितना सिल्वर लगता था उससे थोड़ा कम लगेगा। तो जिसके कारण उसके खरीद में जो है वो कमी देखी जा रही है और जो है इस समय जो सिल्वर सोलर पैनल वालों ने जितने भी खरीदारी किया है वो वो लगभग 633 मेट्रिक टन की खरीदारी की है। जबकि 2024 में इसने 7000 मेट्रिक टन खरीदा था। तो वहां से 1000 मेट्रिक टन की कमी देखी जा रही है। अभी एक महीना बचा हुआ है। तो, यह एक चीज़ उभर कर सामने आ रहा है कि जो इंडस्ट्री के तरफ़ से खासकर जो सोलर पैनल वाला जिस तरीके से बढ़ रहा थाकि पिछले चार पांच साल में जो है 30% की बढ़ोतरी हो
गई थी यहां पे। तो उसमें जो है एक नरमी देखी जा रही हैकि उसका कीमत भाग गया था और ये हो सकता है कि इनकी खरीदारी से कम होने के बाद जो फ्लक्चुएशन होता है और फिर $53 — $54 के आसपास आ सकता है तो फिर यह नई बाइंग कर सकते हैं आने वाले समय के लिए। तो ये चीज जो है देखा गया और साथ में एक और खबर थी कि कई बड़ी कंपनियों ने जो है स्टॉक पाइलिंग भी किया था तो हो सकता है वो स्टॉक पाइलिंग के कारण भी जो है ये अपनी खरीदारी अभी कम कर रहे होंगे इंतजार कर रहे होंगे थोड़ा सा रेट गिरे तो ये कई सारे फैक्टर हैं लेकिन जो सबसे बड़ा जो
अहम चीज होता है कि भाई क्या सिल्वर में क्या रहेगा ये तो हो गया कि आपने जेपी मॉर्गन के बारे में बात कर लिया कि वो रेट को किस तरीके से कर सकता हैकि फिजिकल सिल्वर का बेस ले लिया सोलर पैनल में कमी हो गई है अब इसमें देखा गया है कि एक ईटीएफ है। ईटीएफ (EFT) में बहुत जबरदस्त जो है लोग खरीद रहे हैं सिल्वर को। तो इस समय यह गया कि 2025 में 2025 में लगभग 3545 मेट्रिक टन का जो है ईटीएफ खरीदा गया है। इतने सिल्वर वाला ईटीएफ खरीदा गया है। तो वो एक तेज फ्लो है। लेकिन ईटीएफ क्या है? ईटीएफ में आप भरोसा नहीं कर सकते। ईटीएफ
में है कि अगर सिल्वर की कीमत ऊपर जाएगी तो ईटीएफ में फ्लो बढ़ेगा। अगर कीमत नीचे गिर जाएगी तो ईटीएफ वाले लोग भाग जाएंगे बेचने लगेंगे तो वह एक सिल्वर पर प्रेशर आ सकता है तो यहां पे चीज होता है कि डिमांड एंड सप्लाई का कि डिमांड सप्लाई किस तरीके से है सिल्वर उपलब्ध है या नहीं या सोलर पैनल ने जो कम खरीदना शुरू किया है उससे कितना इंपैक्ट पड़ सकता है ये तमाम बातें तो हमने इसके पहले जो आपको एक रिपोर्ट दिया था जिसमें 2015 से बताया था अब जो रिपोर्ट सामने आई है वो 2009 से लेकर आया मतलब सिल्वर उसके पहले वाला सिल्वर सरप
खत्म था। तो जो 2009 से लेकर 2020 तक 2009 से लेकर 2020 तक जो सिल्वर सरप्लस हुआ था क्योंकि उस समय क्या हो रहा था कि प्रोडक्शन ज्यादा हो रहा था खपत कम हो रहा था। प्रोडक्शन जो है कम और खपत ज्यादा ये 202 से शुरू हुआ था और 2020 तक भी जो सरप्लस था वो 5% के आसपास था। वह चीज देखा गया था जिसमें हम लोगों ने यह भी देख बताया था कि किस तरीके से 2016 से लेकर 2024 तक प्रोडक्शन जो है 7% गिर गया और इंडस्ट्री का मांग जो है वो 38% बढ़ गया है। तो जिसके कारण डिमांड एंड सप्लाई का शॉर्टेज हो रहा है। तो ये चीज है कि जो 11
साल में जितने सिल्वर जमा हुए थे वो सारे सिल्वर 2021 में जो शॉर्टेज रहा और 2022 में जो शॉर्टेज रहा जो है उसमें वो खत्म हो गया। अब जो 2023, 24 और 25 में जो शॉर्टेज चल रहा है वह एग्जैक्ट शॉर्टेज है। मतलब सिल्वर का शॉर्टेज बना हुआ है 3 साल का। तो ये जो है 2023 में देखा गया था कि 16.74% शॉर्टेज था। 2024 में 2.12.79% शॉर्टेज था और 2025 में जो है नवंबर तक में यह 10.24% का शॉर्टेज था। तो यह शॉर्टेज बना हुआ है। यानी तमाम चीजों के बावजूद सोलर पैनल का अगर वह कम भी कर देता है तब भी ऐसा नहीं है कि जितना खपत जितना
प्रोडक्शन हो रहा है या जितना फिर जो रिसाइक् हो होकर आ रहा है उतना खपत हो जाएगा। क्योंकि 2024 का एक बार फिर से फिगर कर दें कि 21000 मेट्रिक टन जो है वो जो है इंडस्ट्री का डिमांड था। 2025 मेट्रिक टन जो है वह सिल्वर प्रोडक्ट हुआ था और टोटल जो सिल्वर का खपत हुआ था वह लगभग 36000 मेट्रिक टन का हुआ था जिसमें कि 11000 मेट्रिक टन का शॉर्टेज देखा जा रहा था। तो इस तरीके से सिल्वर पे जो है अभी काफी जबरदस्त प्रेशर ज़ोन रहेगा। तो देखिए हम लोगों का जो हम लोग इसलिए तो आपको कहते रहे हैं कि जब भी आप कीजिएगा आप अपने सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट से पूछकर
कीजिएगा और मेरे तरफ से सिर्फ एक सुझाव है मुफ्त सुझाव है कि जब भी आप कुछ करें कोई भी आपको बोले कोई भी एनालिस्ट बोले शिप पे कीजिएगा एक बार्गे में बिल्कुल मत कीजिएगा क्योंकि जो इन चीजों से कोई भी अनुमान नहीं लगा सकता है कि सिल्वर कितना ऊपर भागेगा कितना नीचे गिरेगा कितना फ्लक्चुएशन रहेगा इसमें क्योंकि इस समय जो है द्वंद है यहां पे एक द्वंद देखा जा रहा है सिल्वर में और वो वो द्वंद जब ठहराव होगा तो फिर वहां से एक बूम आएगा। अब ये कब आएगा? कितने दिनों में आएगा ये नहीं कहा जा सकता। इसलिए सिर्फ जो है वो सबसे
बड़ा हथियार है। और जो एक चीज जो देखा गया कि $58 से ऊपर जब जाता है $59 तो एक बड़ी तेज बिकवाली आ जाती है। तो वो $59 वाला बैरियर कब टूटता है और उसके बाद से फिर जैसे $50 के $50 टूटा। $50 के बाद उसने $58 का बेस बनाया। अब $58 के बाद कौन सा बेस बनाता है वो देखना होगा। तो इस तरीके से नजर बनाकर रखिए सिल्वर में। अभी काफी उठापटक है। गोल्ड को लेकर है कि अभी एकद महीने जो है यह और कंसोलिडेट कर सकता है। और एक चीज जो देखा गया था कि सेंट्रल बैंक जिस तरीके से गोल्ड की खरीदारी उसने कम कर दिया था लेकिन वो खरीदारी जो है ईटीएफ में हो रहा था।
ईटीएफ (ETFs)
लेकिन ईटीएफ पे आप भरोसा नहीं कर सकते। क्योंकि अगर रेट ऊपर भागता है तो ईटीएफ वाले खरीदते हैं। रेट नीचे गिरता है तो ईटीएफ से बिकवाली हो जाती है। तो जो 200 और 250 मेट्रिक टन के आसपास जो सेंट्रल बैंक जो कम खरीदारी करता हुआ जो दिख रहा है वो भरपाई हो रहा है तेथर के जरिए। तेथर जो स्टेबल कॉइन लेकर आने वाला है जो अमेरिका के लिए उसके तरफ से जो खरीदारी आई थी लगभग 166 मेट्रिक टन की जो खरीदारी आई थी वो उसको बैलेंस कर रहा है। तो इस समय गोल्ड में कोई बहुत जबरदस्त बाइंग इस वक्त दिखता हुआ प्रतीत नहीं हो रहा है। तो इसके कारण गोल्ड में जो है
थोड़ा सा कंसोलिडेट करेगा। इस समय लग रहा है कि गोल्ड जो है 1 से 2 महीने इसमें कंसोलिडेशन होगा। तो अभी जो इस वक्त जो है सारी नजर जो है सिल्वर पर पड़ी हुई है कि सिल्वर किस तरीके से करता है और एक चीज और चीज देखा जा रहा है कि गोल्ड का जो है शेयर बाजार के साथ जो रेश्यो है इस समय डॉऊ के साथ वो जो है 11:1 है और ये आइडियली जो है इसको घटना चाहिए। अब यह कितना घटता है मतलब अगर जो बेस्ट सिनेरियो होता है वो 5:1 का होता है जो कि बहुत मुश्किल होगा। उसके लिए बहुत जबरदस्त क्रैश करना पड़ जाएगा अमेरिका के शेयर बाजार को। लेकिन अगर डॉ में कमी आती है तो
वह पैसे निकल कर जो है वह गोल्ड पे जाएगा। तो इस तरीके से गोल्ड पे अभी वेट एंड वॉच रहेगा कि देखते हैं कि किस तरीके से चीजें रहती हैं और प्लीज चैनल को लाइक सब्सक्राइब कीजिए और जो मेरा दूसरा चैनल है फैक्ट लाइन विथल उसमें हम लोग एक सीरीज चला रहे हैं कि 20ज में 30ज में 40ज में आपको कैसे जो है इन्वेस्टमेंट करना चाहिए। किस तरीके की चीजें होनी चाहिए क्योंकि आप लोग कहते थे कि भाई आप अपने अनुभव को बताइए और तमाम चीजों को बताइए तो यहां इस पे हमने क्या किया है।
Source – Utpal Chaudhary
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This article is intended for educational purposes only. The views and opinions expressed are those of individual analysts or brokerage firms and do not represent the views of GoldSilverReports.com. Investors are strongly advised to consult certified financial experts before making any investment or trading decisions.
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