देश में 109% तक बढ़ेगी गोल्ड की रिसाइक्लिंग

गोल्ड की रिसाइक्लिंग – वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट भी बताती है कि सोने के आयात में 2018 की तुलना में 2019 के आखिरी महीनों में गिरावट देखी गई है। यही नहीं अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 के बीच सोने के आयात में 9 फीसदी गिरावट हुई है। यह स्थिति तब है, जब भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है।

देश में गोल्ड की रिसाइक्लिंग करा कर शादी-विवाह जैसे महत्वपूर्ण मौकों के लिए ज्वैलरी बनवाने का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। इस वर्ष सालभर में 700-800 टन गोल्ड की डिमांड की संभावना थी। लेकिन माना जा रहा है कि सोने के दाम यदि नियंत्रित नहीं हुए तो जहां डिमांड घटकर 500-550 टन के करीब आ जाएगी, वहीं गोल्ड रिसाइक्लिंग 109% बढ़ जाएगी।

वहीं भारत में सोने का आयात भी लगातार घट रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी में सोने का आयात करीब 8.5 फीसदी कम हुआ है।

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जरूरत के हिसाब से ज्वैलरी बनवा रहे लाेग

जबकि बीते 2019 में पूरे साल भर में 119.5 टन सोने की रिसाइक्लिंग हुई थी। और आखिर के तीन महीने अक्टूबर-दिसंबर में 29.1 प्रतिशत सोने की रिसाइक्लिंग हुई थी। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अध्यक्ष एवं ऋद्धिसिद्धी बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार 2020 में गोल्ड की रिसाइक्लिंग बीते वर्ष की तुलना में लगभग 109 फीसदी बढ़कर 250 टन के आस-पास रहने की उम्मीद है। वे बताते हैं कि मुंबई सहित देशभर के सभी प्रमुख बाजारों में बड़े पैमाने पर पुराने गोल्ड को पिघलाकर लोग जरूरत के हिसाब से ज्वैलरी बनवा रहे हैं। जिसकी वजह से इस साल गोल्ड का इंपोर्ट 500-550 टन रहने वाला है। 

इस साल 300-350 टन पुराने सोने की ज्वैलरी बनाई जाएगी

मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुमार जैन बताते हैं पिछले कई वर्षों से भारत में 800-850 टन सोने की डिमांड सालभर में रहती है। दाम 44 हजार प्रति 10 ग्राम तक जा चुका है। इससे इस साल 300-350 टन पुराने सोने की रिसाइक्लिंग कर ज्वैलरी बनने की संभावना है। जबकि देश में इंपोर्ट होकर कुल जितना गोल्ड आता है, उसमें से लगभग 500-550 टन सोने की हॉलमार्किंग कर ज्वैलरी बनती है। 

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इस साल गोल्ड की सेल 30-40 प्रतिशत घटेगी

वहीं इस साल गोल्ड की सेल 30-40 प्रतिशत घटेगी, मगर कारोबार का सालाना टर्नओवर पहले जैसा ही रहेगा। ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) के संयोजक पंकज अरोरा कहते हैं कि गोल्ड का दाम 40 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के ऊपर यदि दो महीने से अधिक समय तक बना रहता है तो सेल 30-40 प्रतिशत घट जाएगी। मगर सालाना रुपए का कारोबार व टर्नओवर जो था वह पहले जैसा ही बने रहने वाला है। क्योंकि मान लिजिए कि पहले 3 लाख में 100 ग्राम गोल्ड मिलता तो अब 3 लाख में 70 ग्राम ही मिल रहा है। इस नजरिए से हमें बाजार में यह ट्रेंड नजर आ रहा है कि जिसे गोल्ड खरीदना है या ज्वैलरी बनवाना है, तो वह बनवा रहा है, मगर सिर्फ उसकी मात्रा अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से कम कर रहा है।

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Neal Bhai has been involved in the Bullion and Metals markets since 1998 – he has experience in many areas of the market from researching to trading and has worked in Delhi, India. Mobile No. - 9899900589 and 9582247600

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