Why’s the Fed Split on Raising Rates?

Why's the Fed Split on Raising Rates?

Gold Silver Reports — Why’s the Fed Split on Raising Rates? — The split at the Federal Reserve over when to next raise interest rates appears to hinge largely on disagreements over the labour market report, comments from policymakers on Friday suggest. 

When the Fed earlier this week decided to stand pat on rates, Fed Chair Janet Yellen said she felt the labour market had more room to run before it could overheat.

Three of 10 voting policymakers dissented, saying they preferred an immediate hike rather than the deferral until later in the year that most saw as appropriate.

On Friday one of the dissenters, Boston Fed chief Eric Rosengren, explained that his vote turned on his view that sharply falling unemployment could create a spike in inflation and actually trigger a recession.

“Unemployment this low may well have the desirable effect of bringing more workers into the labour force ­­unfortunately , only temporarily,“ said Rosengren.Raising rates slightly and gradually, he said, could prevent overheating in the labour market and allow the recovery to continue longer than otherwise.

Comments from other Fed policymakers on Friday , however, underscored that a deep wedge in views on the labour market outlook is driving differences of opinion on when to raise rates.

Minneapolis Fed President Neel Kashkari, responding to questions from the public on Twitter, said he believed the labour market continues to have slack and that he wanted to see the unemployment rate, now at 4.9%, to come down. The bigger worry for him, he said, was that the Fed will raise rates too soon rather than too late.

The view that the labour market is not close to overheating is also central to Dallas Fed President Robert Kaplan’s view that the Fed should be patient and cautious in raising rates. “We don’t think the economy is overheating,“ said Kaplan. “We are not as accommodative as people would think.“

The Fed will have three monthly government reports on the state of the US labour market in hand before its meeting in December, when many traders and economists expect it to finally pull the trigger on a rate hike.  — Neal Bhai Reports

Why’s the Fed Split on Raising Rates?

  • इसे कहते हैं मुंहतोड़ जवाब। पूरी दुनिया के सामने भारत ने पाकिस्तान के चेहरे से नकाब हटा दिया। संयुक्त राष्ट्र आम सभा में भारत की विदेश मंत्री ने नवाज शरीफ के हर सवाल का जवाब दिया और ऐसे सवाल खड़े किए, जिनका पाकिस्तान के पास कोई जवाब नहीं। पाकिस्तान ने कश्मीर का नाम लिया तो सुषमा ने बलूचिस्तान का आईना दिखाया। नवाज ने शांति के प्रति भारत की नीयत पर शक जताया तो सुषमा ने पीठ में छुरा घोंपने के पाकिस्तान के पाप गिनाए। सुषमा ने दो टूक कहा-पाकिस्तान कश्मीर को हड़पने के ख्वाब न देखे। सुषमा ने दुनिया को भी चेताया है कि वक्त आ गया है आतंकवाद के खिलाफ एक हो जाओ, नहीं तो देर हो जाएगी।

    • संयुक्त राष्ट्र में मोदी सरकार की उपलब्धियों को बताते हुए कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत 4 लाख शौचालय बनाएं गए है वहीं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की शुरूआत की गई है। जनधन योजना में गरीबों के बैंक खाते खुले गए है साथ ही डिजिटल इंडिया से युवाओं को मदद मिली है।

      • वहीं पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि सुषमा स्वराज का कहना था कि शांति के बिना समृद्दि नहीं आ सकती है। आतंकवाद पर बोलते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि न्यूयार्क भी आतंकवाद के निशाने पर है और उड़ी पर हुए हमले आतंकवादियों ने ही किए है। आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है और मानवता का अपराधी है। सुषमा स्वराज का कहना था कि आतंकवाद को कौन पनाह दे रहा है इस बाद को पहचाननें की जरुरत है। छोटे- छोटे आतंकवादी समूह अब राक्षस बन रहे है। अगर आतंकवाद से लड़ना है तो एकजुट होंने की जरुरत है। जो आतंकवाद के खिलाफ नहीं वो अलग-थलग नहीं हो सकते है। आतंकवादियों को पनाह देने वाले दंडित हों।

        • हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को शांतिदूत बताया था जिसपर करार जवाब देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि जिनके अपने घर शीशे को हों उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। हमने बातचीत के लिए कोई शर्त नहीं रखी है। मोदी जी ने अपने शपथ ग्रहण में नवाज शरीफ को बुलाया था। भारत ने मित्रता के आधार पर बातचीत करने की कोशिश की है। हमने ईद, क्रिकेट सबकी शुभकामनाएं दीं। लेकिन भारत को मित्रता के बदले उड़ी, पठानकोट, बहादुर अली मिला है। बहादुर अली सीमा पार आतंक का जिंदा सबूत है। सुषमा स्वराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान कश्मीर को कभी हड़प नहीं पाएगा। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है जो भारत ने 1996 में सीसीआईटी का नारा दिया। यूएन से सीसीआईटी को पास करने की अपील की गई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आज के लायक बने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार की जरूरत है ताकि हमारा कल, हमारे आज पर निर्भर हो सकें।

          • दूसरी तरफ भारत दबाव बढ़ाने की अपनी तैयारी कर रहा है। इंडस वॉटर ट्रीटी पर पुर्णविचार हो रहा है। 1960 में साइन हुए इस समझौते के तहत पाकिस्तान और भारत इंडस रिवर सिस्टम कि 6 नदियों का मिलकर इस्तेमाल करते है। आज प्रधानमंत्री मोदी ने सिंधु जल समझौते पर समीक्षा बैठक की और यह बात साफ किया कि खून और पानी साथ में नही बह सकते है। वहीं सूत्रों की माने तो भारत ने सिंधु जल आयोग की बातचीत स्थगित की। भारत में पाक प्रायोजित आतंकवाद खत्म होने तक वार्ता स्थगित की गई है। सूत्रों का कहना है कि भारत सिंधु जल समझौते पर दोबारा विचार कर रहा है। समझौते के तहत भारत अपने हक का पूरा इस्तेमाल करें। सूत्र के अनुसार झेलम नदी पर तुलबुल सिंचाई परियोजना पर दोबारा विचार हो सकता है और चिनाब पर 3 बांध बनाने का काम तेज हो सकता है।

          • गौरतलब हो कि 1960 में पानी के बंटवारे के लिए हुआ भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता किया गया था। इस समझौते में जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान ने दस्तखत किए थे। इस समझौते के तहत सतलुज, ब्यास, रावी, सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था। जिसमें सतलुज, ब्यास और रावी का ज्यादातर पानी भारत के हिस्से में आया वहीं सिंधु, झेलम और चेनाब का ज्यादातर पानी पाकिस्तान के हिस्से गया। सिंधु, झेलम और चेनाब के बहाव पर भारत का नियंत्रण सीमित है।

          • अगर किसी कारणवंश भारत इस समझौते को तोड़ता है तो पाकिस्तान में खेती का बड़ा हिस्सा बर्बाद हो सकता है। वहीं एक बड़े हिस्से में लोग प्यासे रह जाएंगे। इसके साथ ही पाकिस्तान में कई बिजली प्रोजेक्ट बंद हो सकते हैं। लेकिन भारत के लिए यह समझौता तोड़ना आसान नहीं होगा। क्योंकि सिंधु जल समझौता एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। जिसमें तीसरे पक्ष के तौर पर वर्ल्ड बैंक के दस्तखत शामिल किए गए है। इस समझौते के तहत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कोर्ट (आईसीजे) जा सकता है। वहीं पानी रोकने के लिए रातो-रात बांध का निर्माण करना मुश्किल हो सकता है और भारत के बांधों को पाकिस्तान निशाना बना सकता है।

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