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  • आवाज़ की भविष्यवाणी, बजट में क्या होगा

    • मोदी सरकार करीब-करीब आधा सफर कर चुकी है लेकिन आम आदमी से लेकर अर्थव्यवस्था की सेहत में कोई बड़ा बदलाव अब तक देखने को नहीं मिला है। ऐसे में सोमवार को आने वाला आम बजट वो बुनियाद हो सकती है जिस पर अच्छे दिनों की इमारत खड़ी होगी। लेकिन इतने बड़े बजट में आपको किन बड़ी बातों पर फोकस करना चाहिए? यहां बजट पर आवाज़ की भविष्यवाणी आपको पहले से एलर्ट कर रही है कि बजट में कौन से बड़े फैसले आ सकते है?

      • इस बजट में टैक्सपेयर को बड़ी राहत संभव है। सरकार बजट में इनकम टैक्स से छूट की सीमा करीब 40000 रुपये तक बढ़ा सकती है। सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक सरकार छोटे टैक्स पेयर्स को राहत देने के लिए ये कदम उठा सकती है।

        • सरकार बजट में छोटे और मझौले टैक्सपेयर को राहत दे सकती है। बताया जा रहा है कि सरकार इनकम टैक्स में छूट की सीमा 40000 रुपये तक बढ़ा सकती है, ऐसे में 2.5 लाख रुपये की बजाय 2.9 लाख रुपये की आय पर छूट देने का एलान संभव है। वहीं 2.9 लाख रुपये से 5.4 लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसदी टैक्स लग सकता है। 5.4 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की आय पर 20 फीसदी टैक्स लग सकता है।

          • ऊपरी स्लैब में छूट की सीमा बढ़ने की संभावना कम है और 10 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा। माना जा रहा है कि सरकार के नए टैक्स दरों से टैक्सपेयर को 4000-8000 रुपये तक की बचत होगी। लेकिन बजट में 60 और 80 साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी छूट की सीमा बढ़ सकती है। फिलहाल 60 साल से 80 साल की उम्र के लिए छूट की समा 3 लाख रुपये है। 60 साल से 80 साल की उम्र के लिए छूट की समा 3.4 लाख रुपये की जा सकती है। वहीं बजट में 80 साल से ऊपर की उम्र के लिए छूट की सीमा 5.4 लाख रुपये की जा सकती है। फिलहाल 80 साल से ऊपर की उम्र के लिए छूट की सीमा 5 लाख रुपये है।

          • छोटे और मझौले टैक्सपेयर पर बोझ कम करने की कोशिश को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में इस मुद्दे पर अहम बैठक की गई। बताया जा रहा है कि सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी कर टैक्सपेयर को दी जानेवाली छूट की भरपाई करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही कई प्रोडक्ट पर एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी कर भरपाई होगी। सरकार की दलील है कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद टैक्सपेयर को राहत देना जरूरी है। साथ ही बढ़ती महंगाई भी टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने के पीछे बड़ी वजह हो सकती है।

          • पिछले बजट में सरकार ने कहा था कि कॉरपोरेट टैक्सों को धीरे-धीरे 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करेगी।हमारा अनुमान है कि इस बजट से कॉरपोरेट टैक्स को घटाने की शुरुआत हो सकती है। कॉर्पोरेट टैक्स में करीब 1 फीसदी की कटौती संभव है। कॉर्पोरेट टैक्स 30 फीसदी से घटाकर 29 फीसदी कियी जा सकता है। चार साल में कॉर्पोरेट टैक्स 25 फीसदी पर लाने की योजना लाई जा सकती है। इस बजट में टैक्स रियायते किस्तो में खत्म करने की शुरूआत हो सकती है और मशीन, प्लांट, रिसर्च पर टैक्स रियायते हटाई जा सकती हैं।

          • लाख कोशिशों के बावजूद सरकार जीएसटी लागू नहीं कर पाई। जीएसटी लागू हुआ तो अप्रत्यक्ष कर 18 फीसदी के करीब जा सकते हैं। तो आम जनता को अचानक जोर का झटका न लगे इसके लिए सरकार अभी से सर्विस टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है। तो इस इस बजट में जेएसटी की तरफ कदम बढ़ने की कोशिस के तहत सर्विस टैक्स 14.5 फीसदी से बढ़ाकर 16 फीसदी तक किया जा सकता है। टेलिफोन बिल और रेस्टोरेंट में खाना-पीना महंगा हो सकता है, एक्साइज ड्यूटी की रियायतें कम की जा सकती है और कुछ नए प्रोडक्टस एक्साइज ड्यूटी के दायरे में आ सकते हैं। कुछ प्रोडक्टस पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है। वहीं डिब्बाबंद खाने पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है। पास्ता, आईस्क्रीम बिस्किट जैसे आईटम महंगे हो सकते हैं।

          • बजट से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार वित्तीय घाटे को 3.5 फीसदी पर रोक पाएगी या ये इससे ज़्यादा होगा। हमारा अनुमान है कि सरकार वित्तीय घाटे को 3.5 के आसपास रखने की कोशिश करेगी। ग्रोथ और घाटे में बैलेंस बनाने के लिए सरकार आमदनी बढ़ाने की भी कोशिश करेगी और इसके लिए विनिवेश के लिए पुख्ता कदम उठाएगी। अगर सरकार वित्तीय घाटे को कंट्रोल नहीं कर पाई तो निवेशक और आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन सब नाराज होंगे। विशेषज्ञ भी इसे बेहद नाजुक मामला बता रहे हैं।

          • बाजार वो थर्मामीटर है जो पूरी अर्थव्यवस्था का हाल बताता है। लिहाजा बजट पर बाजार की पैनी नजर रहेगी है। चर्चा चल रही है कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर छूट घटा सकती है। लेकिन आवाज़ का अनुमान है कि ऐसा नहीं होगा, बल्कि सरकार शेयरों में निवेश को बढ़ावा दे सकती है।

          • देश के ज़्यादातर शहरों में एक बड़ी आबादी का बड़ा सपना है अपना घर। घर का ख्वाब देखने वाला हर शख्स इस बजट को बड़े गौर से देखेगा। सूत्र बताते हैं कि इस बजट में सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए बड़े एलान कर सकती है। खासकर रियल्टी सेक्टर को बड़ा पुश दे सकती है। हमें तो ये भी पता चला है कि सरकार होमलोन ब्याज पर टैक्स बढ़ा सकती है। इस बार बजट में घर खरीदारों को बढ़ी राहत मिल सकती है, सरकार होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा बढ़ा सकती है सूत्रों के मुताबिक बजट में होमलोन पर टैक्स छूट बढ़ सकती है। होम लोन पर टैक्स छूट 3 लाख रुपये हो सकती है। फिलहाल होम लोन पर 2 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है। आईटी सेक्शन 24 में होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है। सूत्रों के मुताबिक अब पजेशन में 3 साल से ज्यादा लगने पर भी टैक्स छूट मिलेगी। अभी पजेशन में 3 साल से ज्यादा लगने पर सिर्फ 30,000 रुपये की टैक्स छूट मिलती है।

          • सूत्रों के हवाले से मिला खबरों के मुताबिक इस बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग को बूस्टर मिल सकता है। जिसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हाउसिंग को इंफ्रा स्टेटस मिल सकता है साथ ही अफोर्डेबल हाउसिंग को प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग में डाला जा सकता है।

          • सरकार ने साफ संकेत दिया है कि ये बजट गरीबों की उन्नति, किसानों की समृद्धि और युवाओं को रोजगार देने वाला होगा। ऐसे में हम ये मानकर चल रहे हैं कि इस बार के बजट का फोकस गांव और किसान होंगे। इस बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खास पैकेज का एलान किया जा सकता है। भूमिहिन किसानों को किसान का दर्जा मिल सकता है। भूमिहिन किसानों को बीमा आसान शर्तो पर कर्ज का प्रावधान हो सकता है। लघु सिंचाई योजना के लिए खास स्किम की घोषणा संभव है। मनरेगा के तहत ज्यादा खर्च की योजना आ सकती है।

          • देश के बैंकों की हालत खस्ता है। इस वक्त 39 लिस्टेड बैंकों का कुल एनपीए 4.38 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। अगर इस बजट में बैंकों को बचाने के लिए कुछ नहीं किया गया तो देर हो जाएगी। वीआईपी बैंक डूबे तो पूरी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा होगा। इसलिए हमें लगता है कि सरकार इस बजट में बैंकों को बूस्टर देगी।

          • 2016-17 में पीएसयू बैंकों में 25 हजार करोड़ रुपये निवेश की योजना है। इस निवेश की रकम को बढ़कर 35 हजार करोड़ किया जा सकता है। बैड बैंक या नेशनल एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई जा सकती है। नेशनल एआरसी के लिए अलग से पूंजी की ज़रूरत होगी। सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी की जा सकती है। बैंकों के चेयरमैन और सीईओ की नियुक्ति के लिए बैंक बोर्ड ब्यूरो की घोषणा की जा सकती है। बैंकों के लिए एक होल्डिंग कंपनी बनाई जा सकती है। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के चेयरमैन जन्मेजय सिन्हा का मानना है कि डूबते कर्ज की दिक्कत से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर चुनाव सुधार करना होगा। उनका तर्क है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो हर 10-12 साल में बैंको के डूबने का खतरा पैदा होगा।

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